Important Questions for Exams
Q.1 ऊर्जा की परिभाषा दीजिए।
इसके
विभिन्न रूपों की व्याख्या कीजिए।
Q.2 ऊर्जा
स्रोत क्या होते हैं? ये कितने प्रकार के होते हैं
?
Q.3 नवीकरणीय
और अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के बीच अंतर समझाइए ।
Q.4 ऊर्जा
संचय क्या है? विद्युत ऊर्जा को संग्रहीत कैसे किया जाता है?
Q.5 सेल और
बैटरी के बीच क्या अंतर होता है?
Q.6
फ्यूल/ईंधन सेल क्या होते हैं? इनकी विशेषताएँ तथा उपयोग बताइए।
Q.7 सौर सेल
क्या होते हैं ? इनके क्या उपयोग हैं ?
Q.8 सौर पैनल
कितने प्रकार के होते हैं? उदाहरण सहित अंतर समझाइए।
Q.9 पेयजल किन
स्रोतों से मिलता है ? इसके क्या-क्या
उपयोग हैं?
Q.10 जल संरक्षण से आप क्या समझते हैं और
इसकी आवश्यकता क्यों है? इसके लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं ?
Q.11 TDS (कुल घुलनशील ठोस) क्या होता है? यह कैसे जल की
शुद्धि का मानक है ?
Q.12 जल
शुद्धिकरण की विभिन्न तकनीक बताइए ।
Q.13 परासरण और प्रतिलोम/विपरीत
परासरण (RO) की परिभाषा दीजिए।
Q.14 प्रतिलोम/विपरीत परासरण (RO) किस
प्रकार जल शुद्धिकरण में
उपयोगी विधि बन जाता है?
Q.15 अपशिष्ट जल प्रबंधन की विभिन्न विधियाँ विस्तार से
बताइए।
Q.16 पेयजल के लिए कुल घुलनशील ठोस (TDS)
की स्वीकार्य सीमा (Acceptable Limit) और अनुमेय सीमा (Permissible
Limit) क्या हैं? इसका निर्धारण कौन करता है?
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Q.1 ऊर्जा की परिभाषा दीजिए। इसके विभिन्न रूपों की व्याख्या कीजिए।
संकेत: कार्य करने की क्षमता। गतिज, स्थितिज, तापीय आदि।
उत्तर:
परिभाषा: किसी वस्तु के कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा (Energy) कहते हैं। इसका SI मात्रक जूल (Joule) है।
विभिन्न रूप:
गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy): वस्तु की गति के कारण (जैसे - बहता पानी)।
स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy): वस्तु की स्थिति या आकार के कारण (जैसे - तनी हुई कमान)।
तापीय ऊर्जा (Thermal Energy): अणुओं की गति से उत्पन्न उष्मा।
रासायनिक ऊर्जा (Chemical Energy): रसायनों के बंधनों में संचित (जैसे - कोयला, बैटरी)।
विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy): आवेश के प्रवाह से।
प्रकाश ऊर्जा (Light Energy): विकिरण के रूप में (जैसे - सूर्य का प्रकाश)।
Q.2 ऊर्जा स्रोत क्या होते हैं? ये कितने प्रकार के होते हैं?
संकेत: जहाँ से ऊर्जा मिलती है। नवीकरणीय और अनवीकरणीय।
उत्तर:
वे पदार्थ या प्राकृतिक साधन जिनसे हमें उपयोग के लिए ऊर्जा प्राप्त होती है, ऊर्जा स्रोत कहलाते हैं।
प्रकार: मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
नवीकरणीय (Renewable): जो समाप्त नहीं होते (सौर, पवन)।
अनवीकरणीय (Non-renewable): जो सीमित हैं और समाप्त हो सकते हैं (कोयला, पेट्रोलियम)।
Q.3 नवीकरणीय और अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के बीच अंतर समझाइए।
संकेत: पुनः पूर्ति बनाम सीमित भंडार।
उत्तर:
नवीकरणीय ऊर्जा: ये स्रोत प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा कम समय में पुनः उत्पन्न हो जाते हैं। ये प्रदूषण कम फैलाते हैं। उदाहरण: सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल विद्युत।
अनवीकरणीय ऊर्जा: इनका भंडार सीमित है और इन्हें बनने में लाखों वर्ष लगते हैं। इनके उपयोग से पर्यावरण प्रदूषण होता है। उदाहरण: जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल, प्राकृतिक गैस)।
Q.4 ऊर्जा संचय क्या है? विद्युत ऊर्जा को संग्रहीत कैसे किया जाता है?
संकेत: बाद में उपयोग के लिए बचाना। बैटरी, कैपेसिटर।
उत्तर:
ऊर्जा संचय: ऊर्जा को इस तरह से कैप्चर करना कि उसका उपयोग बाद में किया जा सके।
विद्युत ऊर्जा का भंडारण: इसे मुख्य रूप से बैटरियों (रासायनिक ऊर्जा के रूप में), कैपेसिटर (विद्युत क्षेत्र के रूप में), या पंप किए गए हाइड्रो स्टोरेज (स्थितिज ऊर्जा के रूप में) द्वारा संग्रहीत किया जाता है।
Q.5 सेल और बैटरी के बीच क्या अंतर होता है?
संकेत: एकल इकाई बनाम समूह।
उत्तर:
सेल (Cell): यह एक एकल इकाई है जो रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलती है।
बैटरी (Battery): यह दो या दो से अधिक सेलों का संयोजन है। बैटरी का वोल्टेज और क्षमता एक अकेले सेल से अधिक होती है।
Q.6 फ्यूल/ईंधन सेल क्या होते हैं? इनकी विशेषताएँ तथा उपयोग बताइए।
संकेत: हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की अभिक्रिया। निरंतर आपूर्ति।
उत्तर:
परिभाषा: यह एक विद्युत रासायनिक सेल है जो ईंधन (जैसे हाइड्रोजन) की रासायनिक ऊर्जा को सीधे बिजली में बदलता है। जब तक ईंधन मिलता रहता है, यह बिजली बनाता रहता है।
विशेषताएँ: उच्च दक्षता, शोर कम, और प्रदूषण मुक्त (उत्पाद केवल पानी होता है)।
उपयोग: अंतरिक्ष यान, इलेक्ट्रिक वाहन, और बैकअप पावर सिस्टम में।
Q.7 सौर सेल क्या होते हैं? इनके क्या उपयोग हैं?
संकेत: प्रकाश वोल्टीय प्रभाव (Photovoltaic effect)। सिलिकॉन।
उत्तर:
परिभाषा: सौर सेल (या फोटोवोल्टिक सेल) एक अर्धचालक उपकरण (प्रायः सिलिकॉन से बना) है जो सूर्य के प्रकाश को सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
उपयोग: कैलकुलेटर, घड़ियाँ, स्ट्रीट लाइट, कृत्रिम उपग्रहों में बिजली आपूर्ति, और घरों में बिजली के लिए।
Q.8 सौर पैनल कितने प्रकार के होते हैं? उदाहरण सहित अंतर समझाइए।
संकेत: मोनोक्रिस्टलाइन, पॉलीक्रिस्टलाइन, थिन फिल्म।
उत्तर: मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:
मोनोक्रिस्टलाइन (Monocrystalline): एकल शुद्ध सिलिकॉन क्रिस्टल से बने। दक्षता सबसे अधिक, रंग गहरा काला, महंगे।
पॉलीक्रिस्टलाइन (Polycrystalline): कई सिलिकॉन टुकड़ों को पिघलाकर बने। दक्षता मध्यम, रंग नीला, मोनो से सस्ते।
थिन फिल्म (Thin Film): किसी सतह पर फोटोवोल्टिक सामग्री की पतली परत चढ़ाकर बने। लचीले, दक्षता कम, सबसे सस्ते।
Q.9 पेयजल किन स्रोतों से मिलता है? इसके क्या-क्या उपयोग हैं?
संकेत: नदियाँ, भूजल। पीना, खाना बनाना।
उत्तर:
स्रोत: सतही जल (नदियाँ, झीलें, तालाब), भूमिगत जल (कुएँ, हैंडपंप), वर्षा का जल, और हिमनद।
उपयोग: पीने के लिए (हाइड्रेशन), खाना पकाने, व्यक्तिगत स्वच्छता, कृषि, और औद्योगिक प्रक्रियाओं में।
Q.10 जल संरक्षण से आप क्या समझते हैं और इसकी आवश्यकता क्यों है? इसके लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?
संकेत: पानी बचाना। भविष्य के लिए। वर्षा जल संचयन।
उत्तर:
अर्थ: पानी का विवेकपूर्ण उपयोग और बर्बादी को रोकना ताकि भविष्य के लिए जल उपलब्ध रहे।
आवश्यकता: मीठे पानी के सीमित स्रोत और बढ़ती जनसंख्या के कारण।
उपाय: वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting), टपकन सिंचाई (Drip Irrigation), लीकेज ठीक करना, और पानी का पुनर्चक्रण (Recycling)।
Q.11 TDS (कुल घुलनशील ठोस) क्या होता है? यह कैसे जल की शुद्धि का मानक है?
संकेत: पानी में घुले लवण और खनिज। ppm में माप।
उत्तर:
परिभाषा: TDS (Total Dissolved Solids) पानी में घुले हुए सभी अकार्बनिक लवणों (जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम) और कार्बनिक पदार्थों की कुल मात्रा है।
मानक: इसे mg/L या ppm (parts per million) में मापा जाता है। यह बताता है कि पानी में कितनी अशुद्धियाँ घुली हैं। अत्यधिक TDS वाला पानी पीने योग्य नहीं होता और स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा सकता है।
Q.12 जल शुद्धिकरण की विभिन्न तकनीक बताइए।
संकेत: उबालना, छानना, क्लोरीन, RO.
उत्तर:
उबालना (Boiling): कीटाणुओं को मारने के लिए।
छानना (Filtration): ठोस अशुद्धियों को हटाने के लिए।
क्लोरीनीकरण (Chlorination): रसायनों द्वारा कीटाणुशोधन।
UV उपचार: पराबैंगनी किरणों से बैक्टीरिया को निष्क्रिय करना।
विपरीत परासरण (Reverse Osmosis - RO): घुले हुए ठोस पदार्थों (TDS) को हटाने के लिए।
Q.13 परासरण और प्रतिलोम/विपरीत परासरण (RO) की परिभाषा दीजिए।
संकेत: कम सांद्रता से अधिक की ओर (परासरण)। दाब लगाकर उल्टा प्रवाह (RO)।
उत्तर:
परासरण (Osmosis): विलायक (जैसे पानी) का कम सांद्रता वाले घोल से अधिक सांद्रता वाले घोल की ओर एक अर्ध-पारगम्य झिल्ली के माध्यम से स्वतः प्रवाह।
प्रतिलोम परासरण (RO): जब घोल पर परासरण दाब से अधिक बाहरी दाब लगाया जाता है, तो विलायक अधिक सांद्रता से कम सांद्रता (शुद्ध पानी) की ओर बहने लगता है। इसे RO कहते हैं।
Q.14 प्रतिलोम/विपरीत परासरण (RO) किस प्रकार जल शुद्धिकरण में उपयोगी विधि बन जाता है?
संकेत: झिल्ली से अशुद्धियों को रोकना। खारे पानी को मीठा बनाना।
उत्तर:
RO प्रक्रिया में एक बहुत महीन अर्ध-पारगम्य झिल्ली (Semi-permeable membrane) का उपयोग होता है।
जब अशुद्ध पानी पर उच्च दाब लगाया जाता है, तो केवल शुद्ध पानी के अणु झिल्ली से गुजर पाते हैं, जबकि घुले हुए लवण (TDS), भारी धातुएँ, बैक्टीरिया और वायरस पीछे रह जाते हैं। यह खारे पानी को भी पीने योग्य बना सकता है।
Q.15 अपशिष्ट जल प्रबंधन की विभिन्न विधियाँ विस्तार से बताइए।
संकेत: सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), सेप्टिक टैंक।
उत्तर:
केंद्रीकृत उपचार (STP): शहरों में सीवेज को पाइपों द्वारा एक संयंत्र में लाया जाता है।
प्राथमिक उपचार: ठोस कचरे को छानकर अलग करना।
द्वितीयक उपचार: जैविक प्रक्रियाओं द्वारा कार्बनिक पदार्थों का अपघटन।
तृतीयक उपचार: रसायनों या फिल्टर द्वारा पानी को पुनः उपयोग लायक बनाना।
विकेंद्रीकृत उपचार: सेप्टिक टैंक (Septic Tanks) और सोक पिट (Soak Pits) जहाँ सीवेज नेटवर्क नहीं है।
प्राकृतिक विधियाँ: वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) का उपयोग करके पानी को प्राकृतिक रूप से साफ करना।
Q.16 पेयजल के लिए कुल घुलनशील ठोस (TDS) की स्वीकार्य सीमा (Acceptable Limit) और अनुमेय सीमा (Permissible Limit) क्या हैं? इसका निर्धारण कौन करता है?
संकेत: BIS 10500 मानक। 500 और 2000।
उत्तर:
भारत में जल गुणवत्ता के मानक भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा निर्धारित किए जाते हैं (IS 10500:2012 के अनुसार):
स्वीकार्य सीमा (Acceptable Limit): 500 mg/L (इस सीमा तक पानी बिना किसी विशेष उपचार के पीने योग्य माना जाता है)।
अनुमेय सीमा (Permissible Limit): 2000 mg/L (यह सीमा तब लागू होती है जब पानी का कोई अन्य वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध न हो)।
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